स्कैम 1992 और मनु मानेक: शेयर बाजार का ब्लैक कोबरा कौन था?
अगर आपने "स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी" वेब सीरीज देखी है, तो आपको उस दौर की एक झलक जरूर मिली होगी, जब शेयर बाजार में ऐसा तूफान आया था कि पूरा देश हिल गया था। यह सीरीज 1992 के उस मशहूर घोटाले की कहानी बयान करती है, जिसने स्टॉक मार्केट को बदल कर रख दिया। इसमें हर्षद मेहता को तो सबने देखा, जिसे उस समय स्टॉक मार्केट का "किंग" कहा जाता था। लेकिन इस सीरीज में एक और शख्स की कहानी छिपी थी, जो हर्षद से पहले बाजार का बेताज बादशाह था। उसका नाम था मनु मानेक मुंद्रा, जिसे लोग "ब्लैक कोबरा" और "बेयर कार्टेल का बाप" कहते थे।
आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे कि मनु मानेक कौन थे, उन्होंने शेयर बाजार में अपनी ताकत कैसे बनाई, और उन्हें ब्लैक कोबरा की उपाधि क्यों मिली। साथ ही, हम बुल और बेयर कार्टेल की दुनिया को भी समझेंगे। तो चलिए, इस कहानी को शुरू से जानते हैं, वो भी बिल्कुल आसान और देसी अंदाज में!
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स्टॉक मार्केट में सारे BEAR का बाप या Title of BLACK COBRA |
1992 का घोटाला: क्या था माजरा?
1992 में जब हर्षद मेहता का घोटाला सामने आया, तो पूरा देश हैरान रह गया। बैंकिंग सिस्टम से लेकर स्टॉक मार्केट तक, सब कुछ डगमगा गया था। हर्षद ने शेयरों की कीमतें आसमान छूने वाली ऊँचाइयों तक पहुँचाईं, और फिर जब सच सामने आया, तो बाजार धड़ाम से नीचे आ गया। लेकिन इस सीरीज में एक किरदार ऐसा भी था, जो हर्षद के उभरने से पहले स्टॉक मार्केट का सिरमौर था। "स्कैम 1992" में मनु मानेक का रोल सतीश कौशिक ने निभाया था, और उनका किरदार इतना दमदार था कि लोग उनकी असली कहानी जानने को उत्सुक हो गए। सतीश कौशिक का हाल ही में निधन हो गया, लेकिन उनका यह किरदार हमेशा याद रहेगा।
मनु मानेक: शेयर बाजार का ब्लैक कोबरा
मनु मानेक कोई आम ब्रोकर नहीं थे। वह एक ऐसा शख्स थे, जिसका नाम सुनते ही स्टॉक मार्केट के लोग काँपने लगते थे। उन्हें "ब्लैक कोबरा" इसलिए कहा जाता था, क्योंकि उनकी चालें तेज, चालाक, और खतरनाक थीं। हर्षद मेहता से पहले वह शेयर बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ी थे। उस समय उनकी तूती बोलती थी—कंपनियाँ उनके बिना सलाह लिए कोई फैसला नहीं करती थीं। अगर कोई उनकी बात नहीं मानता, तो वह अपने तरीके से उस कंपनी के शेयरों को नीचे ले आते थे।
उनका दबदबा इतना था कि लोग कहते थे कि कंपनियों के डायरेक्टर तक मनु मानेक की मर्जी से चुने जाते थे। वह तय करते थे कि कौन सी कंपनी कितना मुनाफा देगी। अगर कोई उनकी सलाह के खिलाफ जाता, तो उसका नुकसान तय था। मनु एक बेयर ऑपरेटर थे, यानी वह बाजार में मंदी लाकर पैसा कमाते थे। उनकी शॉर्ट सेलिंग की कला ऐसी थी कि वह किसी भी शेयर को अपने इशारे पर नचा सकते थे।
उनकी संपत्ति का अंदाजा
कहा जाता है कि जब मनु मानेक की मृत्यु हुई, तो उनकी संपत्ति करीब 50 मिलियन डॉलर की थी। उस जमाने में यह बहुत बड़ी रकम थी। आज के हिसाब से इसे करोड़ों रुपये में गिना जा सकता है। लेकिन यह सिर्फ अनुमान है, क्योंकि उनके बारे में सटीक जानकारी कम ही उपलब्ध है।
मनु मानेक की जिंदगी: शुरू से लेकर शिखर तक
मनु मानेक का जन्म कोलकाता में हुआ था। वह एक साधारण परिवार से थे, लेकिन उनकी सोच बड़ी थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्टॉक एक्सचेंज में कदम रखा। उस समय शेयर बाजार उतना विकसित नहीं था, लेकिन मनु ने अपनी मेहनत और समझ से इसमें अपनी जगह बनाई। शुरुआत में छोटे-मोटे सौदे किए, फिर धीरे-धीरे बाजार की नब्ज पकड़ ली।
उन्होंने देखा कि बाजार में उतार-चढ़ाव से पैसा कमाया जा सकता है। वह हर दिन बाजार को गौर से देखते, हर सौदे पर नजर रखते, और फिर अपनी चाल चलते। उनकी मेहनत रंग लाई, और जल्द ही वह स्टॉक मार्केट के बड़े नाम Islamist में शुमार हो गए। उनकी खासियत थी कि वह जोखिम लेने से नहीं डरते थे। जहाँ बाकी लोग डरते थे, वहाँ मनु मौका देखते थे।
ब्लैक कोबरा की उपाधि: कैसे बने बेयर कार्टेल के बादशाह?
मनु मानेक को "ब्लैक कोबरा" का खिताब उनके बेयर ऑपरेटर होने की वजह से मिला। लेकिन पहले यह समझ लेते हैं कि बेयर और बुल कार्टेल क्या होते हैं।
बुल कार्टेल: तेजी का खेल
बुल कार्टेल वो लोग होते हैं, जो बाजार में तेजी की उम्मीद करते हैं। ये लोग शेयरों की कीमतें बढ़ाने की कोशिश करते हैं। हर्षद मेहता इसका सबसे बड़ा उदाहरण थे। वह शेयर खरीदते, उनकी कीमतें ऊपर ले जाते, और फिर मुनाफा कमाते। बुल कार्टेल का मानना होता है कि बाजार ऊपर जाएगा, और वे इसी भरोसे पर दाँव लगाते हैं।
बेयर कार्टेल: मंदी से मुनाफा
बेयर कार्टेल इसके उलट होता है। ये लोग बाजार में मंदी लाने की कोशिश करते हैं। वे शेयरों की कीमतें गिराकर पैसा कमाते हैं। इसे शॉर्ट सेलिंग कहते हैं। इसमें वे ब्रोकरों से शेयर उधार लेते हैं, उन्हें बाजार में बेचते हैं। इससे शेयरों की कीमत नीचे आती है। फिर वे कम दाम पर худा पर बैठते हैं, और फिर वे सस्ते में शेयर खरीदते हैं, उधार चुकाते हैं, और अंतर का पैसा अपनी जेब में डाल लेते हैं। मनु मानेक इस खेल के उस्ताद थे।
क्यों पड़ा ब्लैक कोबरा नाम?
मनु मानेक की शॉर्ट सेलिंग इतनी तेज और सटीक थी कि वह किसी भी कंपनी को अपने इशारे पर नीचे ला सकते थे। उनकी चालें कोबरे की तरह थीं—चुपचाप, तेज, और घातक। वह बाजार में अपनी ताकत से डर पैदा करते थे। इसलिए उन्हें "ब्लैक कोबरा" कहा जाने लगा।
मनु मानेक ने पैसा कैसे कमाया?
मनु मानेक की कमाई का तरीका उनकी चतुराई और ताकत का नतीजा था। उनके पास कई रास्ते थे, जिनसे उन्होंने अपनी संपत्ति बनाई।
1. पैसे उधार देना
उस जमाने में बैंक से सस्ता लोन मिलना आसान नहीं था। मनु मानेक अपनी संपत्ति का इस्तेमाल करते थे और ट्रेडर्स को शेयर खरीदने के लिए पैसा उधार देते थे। इसके बदले वह 20-30% की भारी ब्याज वसूलते थे। इससे उनकी कमाई तो होती ही थी, साथ ही उन्हें यह भी पता चलता था कि कौन सा ट्रेडर किस शेयर में पैसा लगा रहा है। यह जानकारी उनके लिए सोने की खान थी।
2. शॉर्ट सेलिंग का जादू
मनु ब्रोकरों से शेयर उधार लेते, उन्हें बाजार में बेचते, और कीमतें गिरने का इंतजार करते। जैसे ही कीमत नीचे आती, वे सस्ते में शेयर खरीद लेते और उधार चुका देते। इस अंतर से उन्हें मोटा मुनाफा होता था। उनकी यह चाल इतनी सटीक थी कि बाजार उनके आगे बेबस हो जाता था।
3. बेयर कार्टेल की ताकत
मनु मानेक अकेले बाजार को नहीं हिला सकते थे। इसलिए उन्होंने एक बेयर कार्टेल बनाया। इसमें कुछ बड़े नाम शामिल थे, जैसे राकेश झुनझुनवाला और राधाकिशन दमानी (हालांकि यह सिर्फ अनुमान है)। इस कार्टेल ने मिलकर ब्रोकरों के साथ गठजोड़ किया और बाजार को अपने काबू में रखा। वे शेयरों की कीमतें गिराते और मुनाफा कमाते।
4. बाजार की गहरी समझ
मनु की सबसे बड़ी ताकत थी उनकी बाजार को पढ़ने की काबिलियत। वह हर छोटी-बड़ी हलचल पर नजर रखते थे। उन्हें पता था कि कब खरीदना है, कब बेचना है, और कब बाजार को नीचे लाना है। उनकी यह समझ उन्हें सबसे अलग बनाती थी।
मनु मानेक का दबदबा
उस समय शेयर बाजार में मनु मानेक का ऐसा रुतबा था कि कंपनियाँ उनके बिना सलाह लिए कुछ करने की हिम्मत नहीं करती थीं। अगर कोई उनकी बात नहीं मानता, तो वह अपनी शॉर्ट सेलिंग से उस कंपनी के शेयरों को जमीन पर ला देते। इससे कंपनियों को भारी नुकसान होता, और उनका डर और बढ़ जाता। लोग उन्हें "बेयर कार्टेल का बाप" कहते थे, क्योंकि वह इस खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी थे।
हर्षद मेहता से टक्कर
"स्कैम 1992" में दिखाया गया कि मनु मानेक और हर्षद मेहता के बीच एक तरह की जंग थी। हर्षद तेजी लाना चाहते थे, और मनु मंदी। यह दो अलग-अलग सोच की लड़ाई थी। हर्षद ने अपनी चालाकी से बाजार को ऊपर उठाया, लेकिन मनु का अनुभव भी कम नहीं था। यह टक्कर स्टॉक मार्केट की सबसे यादगार जंगों में से एक थी।
मनु मानेक की मृत्यु
मनु मानेक की मृत्यु के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। कुछ कहते हैं कि वह चुपचाप दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी कहानी आज भी जिंदा है। वह एक ऐसे शख्स थे, जिन्होंने अपने दम पर शेयर बाजार में एक साम्राज्य खड़ा किया।
कुछ सवालों के जवाब
1. मनु मानेक को ब्लैक कोबरा क्यों कहा जाता था?
उनकी तेज और खतरनाक शॉर्ट सेलिंग की वजह से।
2. उनकी संपत्ति कितनी थी?
करीब 50 मिलियन डॉलर, ऐसा अनुमान है।
3. बेयर और बुल में क्या फर्क है?
बेयर कीमतें गिराता है, बुल बढ़ाता है।
आखिरी बात
मनु मानेक की कहानी शेयर बाजार की एक ऐसी सच्चाई है, जो "स्कैम 1992" से भी बड़ी है। वह एक चालाक, ताकतवर, और अनोखा शख्स थे, जिन्होंने बाजार को अपने इशारे पर चलाया। उनकी "ब्लैक कोबरा" वाली पहचान उनकी ताकत का सबूत है। अगर आपको यह कहानी पसंद आई, तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। और हाँ, नीचे कमेंट करके बताएँ कि आपको यह कैसी लगी। शेयर बाजार की और कहानियाँ जानना चाहते हैं? हमें बताएँ, हम आपके लिए और लाएँगे!
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