भारतीय शेयर मार्केट की शुरुआत कब और कैसे हुई: एक ऐतिहासिक सफर
भारतीय शेयर मार्केट आज दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते स्टॉक मार्केट्स में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी नींव कब और कैसे पड़ी? शेयर बाजार, जो आज लाखों लोगों के लिए धन कमाने का जरिया बन चुका है, उसकी शुरुआत बहुत ही साधारण तरीके से हुई थी। इस आर्टिकल में हम भारतीय शेयर मार्केट के इतिहास, इसकी शुरुआत, और इसके विकास की पूरी कहानी को विस्तार से जानेंगे। तो चलिए, समय में पीछे चलते हैं और देखते हैं कि यह सब कैसे शुरू हुआ।
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भारतीय शेयर मार्केट की शुरुआत कब और कैसे हुई |
शेयर मार्केट क्या है?
इसके इतिहास में जाने से पहले यह समझना जरूरी है कि शेयर मार्केट क्या होता है। शेयर बाजार एक ऐसी जगह है जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं, तो आप उसके एक छोटे से हिस्से के मालिक बन जाते हैं। भारत में यह प्रक्रिया दो मुख्य स्टॉक एक्सचेंज—BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज)—के जरिए होती है। लेकिन इनकी शुरुआत से पहले शेयर बाजार का स्वरूप बहुत अलग था।
भारतीय शेयर मार्केट की शुरुआत: प्रारंभिक काल
भारतीय शेयर मार्केट की कहानी 18वीं और 19वीं सदी से शुरू होती है, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार कर रही थी। उस समय शेयर बाजार जैसा कोई औपचारिक ढांचा नहीं था, लेकिन कंपनी अपने बॉन्ड्स और स्टॉक्स जारी करती थी, जिन्हें यूरोपीय व्यापारी और कुछ अमीर भारतीय खरीदते थे। यह वह दौर था जब भारत में शेयर ट्रेडिंग की नींव पड़ रही थी।
हालांकि, औपचारिक रूप से भारतीय शेयर मार्केट की शुरुआत 19वीं सदी में हुई। 1850 के दशक में मुंबई में कुछ ब्रोकर और व्यापारी स्टॉक और बॉन्ड्स की खरीद-फरोख्त करने लगे। उस समय कोई स्टॉक एक्सचेंज नहीं था, इसलिए यह ट्रेडिंग अनौपचारिक तरीके से सड़कों पर या पेड़ों के नीचे होती थी। मुंबई के टाउन हॉल के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे व्यापारी इकट्ठा होते थे और ट्रेडिंग करते थे। यहीं से भारत में शेयर बाजार की नींव पड़ी।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की स्थापना
भारतीय शेयर मार्केट का असली इतिहास तब शुरू हुआ जब 1875 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की स्थापना हुई। यह न सिर्फ भारत का पहला स्टॉक एक्सचेंज था, बल्कि पूरे एशिया का भी पहला स्टॉक एक्सचेंज था। BSE की शुरुआत एक छोटे से समूह के साथ हुई, जिसे "The Native Share & Stock Brokers Association" कहा गया। इसके संस्थापक प्रेमचंद रायचंद जैसे व्यापारी थे, जो उस समय के बड़े स्टॉक ब्रोकर थे।
शुरुआत में BSE में ट्रेडिंग बहुत सीमित थी। यह ज्यादातर कपास (कॉटन) मिल्स, बैंकिंग कंपनियों, और रेलवे स्टॉक्स तक सीमित थी। उस समय शेयरों की खरीद-फरोख्त फिजिकल सर्टिफिकेट्स के जरिए होती थी, और ट्रेडिंग खुले आसमान के नीचे या छोटे ऑफिसों में की जाती थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, BSE ने संगठित रूप लेना शुरू किया और 1899 में इसे एक स्थायी बिल्डिंग मिली, जो आज की प्रसिद्ध "दलाल स्ट्रीट" है।
औपनिवेशिक काल में शेयर बाजार का विकास
19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में भारत में औद्योगिक क्रांति शुरू हुई। कपास मिल्स, जूट इंडस्ट्री, और रेलवे जैसे सेक्टर तेजी से बढ़े, जिसके चलते शेयर बाजार में भी तेजी आई। ब्रिटिश सरकार और कंपनियों ने भारत में अपने प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी जुटाने के लिए स्टॉक्स और बॉन्ड्स जारी किए। इस दौरान कोलकाता, अहमदाबाद, और मद्रास (अब चेन्नई) जैसे शहरों में भी छोटे-मोटे स्टॉक एक्सचेंज शुरू हुए।
1920 और 1930 के दशक में शेयर बाजार में उछाल आया, लेकिन यह दौर सट्टेबाजी (स्पेकुलेशन) का भी था। कई लोग बिना सोचे-समझे शेयरों में पैसा लगाने लगे, जिसके चलते बाजार में अस्थिरता बढ़ी। फिर 1929 में वैश्विक मंदी (Great Depression) ने भारतीय शेयर बाजार को भी प्रभावित किया। इस दौरान कई निवेशकों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन इससे यह सबक मिला कि शेयर बाजार को नियमों और नियंत्रण की जरूरत है।
स्वतंत्रता के बाद शेयर बाजार
1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद शेयर बाजार ने एक नया मोड़ लिया। देश में औद्योगीकरण तेज हुआ, और सरकार ने पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (PSUs) की स्थापना की। इस दौरान कई नई कंपनियां शेयर बाजार में आईं, और निवेशकों की संख्या बढ़ने लगी। 1956 में BSE को भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से मान्यता दी, जिसके बाद यह और मजबूत हुआ।
1950 और 1960 के दशक में भारत में कई क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंज भी शुरू हुए, जैसे दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज, कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज, और अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज। लेकिन BSE सबसे बड़ा और प्रभावशाली बना रहा। इस दौरान शेयर बाजार में ट्रेडिंग अभी भी मैनुअल थी, और इसमें समय लगता था।
1990 का दशक: शेयर बाजार में क्रांति
भारतीय शेयर मार्केट में असली क्रांति तब आई जब 1991 में भारत ने आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई। इससे विदेशी निवेशकों के लिए दरवाजे खुले, और शेयर बाजार में नई जान आई। इसी दौरान दो बड़े बदलाव हुए:
- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की स्थापना:
1992 में NSE की स्थापना हुई, और यह जल्द ही भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज बन गया। NSE ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की शुरुआत की, जिसने शेयर बाजार को तेज, पारदर्शी, और सुलभ बनाया। इसका मुख्य इंडेक्स "निफ्टी 50" आज भारत के शेयर बाजार की सेहत का पैमाना है। - SEBI का गठन:
1992 में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की स्थापना हुई। SEBI ने शेयर बाजार को रेगुलेट करना शुरू किया ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा हो और धोखाधड़ी कम हो।
हर्षद मेहता स्कैम और सबक
1990 का दशक शेयर बाजार के लिए सुनहरा था, लेकिन यह विवादों से भी भरा था। 1992 में हर्षद मेहता स्कैम ने बाजार को हिलाकर रख दिया। मेहता ने बैंक फंड्स का दुरुपयोग करके शेयरों की कीमतों को मैनिपुलेट किया, जिससे बाजार में भारी उछाल और फिर गिरावट आई। इस घटना ने लाखों निवेशकों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन इससे SEBI के नियम सख्त हुए और बाजार में पारदर्शिता बढ़ी।
21वीं सदी में भारतीय शेयर मार्केट
2000 के बाद भारतीय शेयर मार्केट ने तेजी से तरक्की की। इंटरनेट और टेक्नोलॉजी के आने से ट्रेडिंग पूरी तरह डिजिटल हो गई। Zerodha, Upstox, और Groww जैसे ऑनलाइन ब्रोकर्स ने आम लोगों के लिए शेयर बाजार को सुलभ बनाया। आज BSE का सेंसेक्स और NSE का निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर हैं।
2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारतीय शेयर बाजार ने शानदार रिकवरी दिखाई। आज यह दुनिया के टॉप 10 स्टॉक मार्केट्स में शामिल है, और लाखों भारतीय इसमें निवेश कर रहे हैं।
भारतीय शेयर मार्केट की खासियतें
- विविधता: यह IT, ऑटो, फार्मा, और बैंकिंग जैसे कई सेक्टर को कवर करता है।
- निवेशक आधार: छोटे निवेशकों से लेकर विदेशी फंड्स तक, सभी इसमें शामिल हैं।
- तकनीक: डिजिटल ट्रेडिंग और मोबाइल ऐप्स ने इसे आसान बनाया है।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर मार्केट की शुरुआत एक बरगद के पेड़ के नीचे से हुई थी, और आज यह गगनचुंबी ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। BSE की स्थापना से लेकर NSE और SEBI के आने तक, इसने लंबा सफर तय किया है। यह न सिर्फ अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि आम लोगों के लिए वित्तीय आजादी का रास्ता भी है। अगर आप इसमें निवेश करना चाहते हैं, तो इसके इतिहास से प्रेरणा लें और सही जानकारी के साथ आगे बढ़ें।
आपके लिए भारतीय शेयर मार्केट का यह सफर कैसा लगा? अपने विचार कमेंट में जरूर बताएं!
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